Monday, November 8, 2010

दिवाली की कविता











दिवाली आई दिवाली आई.
खुशियों के मन भर लाई,
हमने खुश होकर दिए जलाए मोमबतती जलाई
पटाखे जलाए, पैसे उड़ाए
धूम पटाक,धूम धूम पटाक,धूम धूम धूम शूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊ पटाक ,पटाक पटाक पटाक
प्रदूषण फैलाया, धुंआ उड़ाया

खेल ख़त्म पैसा हज़म











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